सांस की बदबू की आयुर्वेदिक दवा एवं उपचार

by | Nov 21, 2020 | Health Tips & Treatments

आयुर्वेद में सांस की बदबू को मुख दुर्गंधी (Mouth Odor) कहा जाता है। मुंह से दुर्गंध का मुख्य कारण उदर विकार (Abdominal Disorders) एवं मुंह में जीवाणु संक्रमण होता है। मुंह से दुर्गध आने पर व्यक्ति कभी कभी अपमानित महसूस करता है। पायरिया (Pyorrhea) जैसे मसूड़ों के रोग एवं गले के संक्रमण के कारण भी मुंह से दुर्गंध आ सकती है। मुंह से दुर्गंध के उपचार में मुंह की सफाई के साथ ही पाचन तंत्र की सफाई भी आवश्यक है।आयुर्वेद में मुंह से आने वाली दुर्गंध एवं मुख रोगों के लिए गंदूष (Foul), कवल (kaval) एवं प्रतिसारण (Transmission)आदि विधियों का प्रयोग किया जाता है।

दातुन (Datun) : मुंह से आने वाली दुर्गंध एवं अन्य मुख रोगो से बचने के लिए नियमित रूप से भोजन के बाद दातुन की सलाह दी जाती है। दातुन के लिए एक मुलायम, पत्ते रहित पतले तने का उपयोग किया जाता है। दातुन के लिए नीम, मुलेठी या अर्जुन जैसी जड़ी बूटियों के कोमल तने प्रयोग में लिए जाते हैं। दातुन कि मोटाई उंगली के बराबर तथा इसका स्वाद कुछ कसैला (Astringent) होना चाहिए।

गंडूष विधि (Gooseberry law)इस विधि में ओषधीय तरल को मुंह में भरकर तब तक रखा जाता है, जब तक कि तरल-आंखों या नाक से ना निकलने लगे। इसके बाद इसे थूक दिया जाता है।

यह भी पढ़ें :-

कवल विधि (kaval Method)– इस विधि में ओषधीय पेस्ट या तरल को मुंह में भर कर घुमाया जाता है, और कुछ समय के बाद थूक दिया जाता है। शहद, तेल, दूध, ओषधीय घी आदि को इस प्रक्रिया में प्रयोग किया जाता है।

प्रतिसारण (Transmission)– इस विधि में पाउडर या पेस्ट को शहद में मिलाकर मसूड़ों और दांतो की मालिश की जाती है। इस प्रक्रिया में त्रिकूट (Trikuta), त्रिफला (Triphala) एवं तृजात आदि औषधियों का उपयोग किया जाता है।

इलायची (Cardamom)– यह गरम एवं स्वाद में मीठी होने के साथ पाचन (Digestion) में सुधार लाती है। इसके प्रयोग से उल्टी, दस्त, मितली आदि में आराम मिलता है।पाचन में सुधार लाने के कारण ही इससे मुंह की दुर्गंध भी दूर होती है। इसका उपयोग दूध के ढ़ेया पाउडर (Molded powder) के रूप में किया जाता है।

नीम (Azadirachta Indica)यह रक्त शोधक से जीवाणु रोधी (Antibacterial) होने के कारण दातुन के लिए प्रयोग की जाती है। इसकी दातुन से मंजन करने से मुंह की बदबू कम होती है। इसका उपयोग अर्क, काढ़े या तेल के रूप में भी किया जाता है।

हरिद्रा (Haridra)हल्दी में जीवाणु-रोधी, सुगंधक एवं कृमि नाशक (Insecticide) गुण होते हैं, जिससे इसका उपयोग मुंह की दुर्गन्ध दूर करने में किया जाता है। हल्दी से दांतो एवं मसूड़ों पर मालिश करने से मुंह की दुर्गंध समाप्त हो जाती है। इनके अतिरिक्त नाग्रादी क्वाथ (Nagradi Decoction) एवं त्रिफ़ला चूर्ण (Triphala Churna) भी मुंह की दुर्गंध समाप्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

Dr Neha
Compiled By:
Dr. Neha Ahuja
(BAMS, NDDY, DNHE)

Disclaimer –This content only provides general information, including advice. It is not a substitute for qualified medical opinion by any means. Download ‘AAYUSHBHARAT App’ now for more information and consult a Aayush Specialist sitting at home as well as get medicines.

To Get Consultation Download The AAYUSH BHARAT PATIENT APP :
Click Here

Connect with AAYUSH BHARAT ON :
Twitter, Facebook, Instagram, Website, YouTube, Telegram Channel, Blog, LinkedIn, Quora, WhatsApp

0 Comments

Submit a Comment

Your email address will not be published.